दल से बिछड़े मादा हाथी शावक की मौत झुंड से मिलाने के बाद खेत में मिला शव


मानव हाथी द्वंद के ज़मीनी सच्चाई को छिपाने का खेल या मजबूरी

कुड़ेकेला :- छाल वन परिक्षेत्र में करीब 40 हाथियों के दल से बिछड़ी दो महीने की एक मादा शावक की मौत हो गई। शावक को झुंड से मिलाने के लिए वन विभाग की ऑपरेशन टीम ने प्रयास किया और रात में उसे हाथियों के दल तक पहुंचाने में सफलता मिली। लेकिन इस घटनाक्रम का अंत दुखद रहा। बाद में मादा शावक का शव कीचड़ से भरे एक खेत में मिला। प्रारंभिक आशंका है कि दलदली खेत में फंसने और बाहर नहीं निकल पाने के कारण उसकी मौत हुई।
40 हाथियों के दल से बिछड़ा शावक:-छाल रेंज में बीते 12 तारीख़ को 40 हाथियों के बड़े दल से दो महीने की एक मादा शावक अलग हो गई। इसके बाद आननफानन में उसे सुरक्षित रुप से झुंड से मिलाने के प्रयास शुरू किए गए।
रात में झुंड से मिलाने में मिली सफलता:-ऑपरेशन टीम के सूत्रों के मुताबिक रात में शावक को हाथियों के समूह से मिला दिया गया। इसके बाद वह दल के साथ जंगल की ओर चला गया था। उस समय अधिकारी द्वारा शावक के झुंड से दोबारा जुड़ने की जानकारी साझा की गई।
कीचड़ भरे खेत में मिला शव:-झुंड के साथ जंगल की ओर जाने के बाद मादा शावक का शव एक कीचड़ से भरे खेत में मिला। इससे उसकी मौत को लेकर नए सवाल खड़े हो गए।प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि खेत के दलदली होने के कारण शावक उसमें फंस गया होगा और बाहर निकलने में असमर्थ रहने के चलते उसकी मौत हो गई। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मानव-हाथी द्वंद के आंकड़ों को छिपाने का खेल या मजबूरी :-बीते कुछ महीनों में धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में हाथी शावकों के असमय मृत्यु के मामले लगातार सामने आए। अधिकांश मामलों में हाथी शावक के खेत के कीचड़ में फंसने से मौत हुई। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ और स्वाभाविक रूप से भी जब कभी हाथियों का कोई बड़ा समूह किसी रिहायशी इलाके के आसपास पहुंचता है तो ग्रामीण उन्हें अपने क्षेत्र से बाहर करने के लिए उपलब्ध सभी अनुचित उपाय अपनाते हैं। वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद रहने के बावजूद मानव एवं अन्य संसाधन के अभाव में ऐसे कृत्यों पर लगाम लगाने में सक्षम नहीं होते। जिसके कारण ग्रामीणों द्वारा हाथियों को अंधाधुन तरीके से भगाया जाता है और इसी भगदड़ में कई हाथी शावक अकाल मौत के मुंह में समा जा रहे हैं।
किन कारणों से लिया गया झुंड से मिलाने का निर्णय :-इस मामले में जानकारों का मानना है कि तस्वीर में हाथी शावक कमजोर नज़र आ रहा है ऐसे में दल से बिछड़े नन्हे हाथी शावक की निगरानी कर रहे टीम द्वारा उसके स्वास्थ्य परीक्षण में क्या पाया गया और वन विभाग के अनुसार भी दुर्लभ मामलों में ही दल से बिछड़े हाथी को समूह स्वीकार करता है। फिर इस मामले में हाथी शावक को झुंड से मिलाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया यह अभी स्पष्ट नहीं है।
डेढ़ सौ से अधिक हाथी कर रहे विचरण :-वर्तमान समय में धर्मजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र अंतर्गत कुल 154 हाथियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। जिसमें 39 हाथियों का सबसे बड़ा समूह फिलहाल छाल रेंज के छाल बीट में ही डटे हुए हैं। दो महीने का मृत पाया गया मादा हाथी शावक इसी दल का हिस्सा था।

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